🌸 मूर्ति का वर्णन
इस दिव्य मूर्ति में भगवान श्रीराम मध्य में विराजमान हैं। उनका नीला स्वरूप अनंतता, सत्य और दिव्य संरक्षण का प्रतीक है। सिर पर स्वर्ण मुकुट, गले में माला और धनुष-बाण के साथ वे मर्यादा पुरुषोत्तम का रूप धारण किए हुए हैं।
चारों ओर नवग्रह देवता गोलाकार आभामंडल में सुशोभित हैं—
•सूर्य (ऊर्जा और तेज),
•चंद्र (शांति और मन),
•मंगल (बल और साहस),
•बुध (बुद्धि और वाणी),
•बृहस्पति (ज्ञान और गुरु कृपा),
•शुक्र (सौंदर्य और भोग-विलास),
•शनि (कर्म और न्याय),
•राहु और केतु (कर्मफल व आध्यात्मिक जागरण)।
3D रूप में बना यह चित्र जीवंत प्रतीत होता है, मानो स्वयं श्रीराम अपने भक्तों के समक्ष खड़े हों और संपूर्ण ब्रह्मांडीय ऊर्जा उन पर कृपा बरसा रही हो।
🌞 प्रतीकात्मक महत्व
•श्रीराम – धर्म, आदर्श और सत्य के रक्षक।
•नवग्रह – मानव जीवन पर प्रभाव डालने वाली ब्रह्मांडीय शक्तियाँ।
•दोनों का संगम – यह संदेश देता है कि श्रीराम की भक्ति से सभी ग्रह शांत होते हैं और जीवन में संतुलन आता है।
🌺 आध्यात्मिक लाभ
1.ग्रह दोष शांति – शनि, राहु, केतु आदि के अशुभ प्रभाव शांत होते हैं।
2.धर्म और संरक्षण – श्रीराम की कृपा से जीवन में धर्म मार्ग पर चलने की शक्ति मिलती है।
3.शांति और समृद्धि – सूर्य और चंद्र से घर-परिवार में सुख-शांति आती है।
4.विद्या और करियर में उन्नति – बुध और बृहस्पति से बुद्धि, ज्ञान और सफलता मिलती है।
5.स्वास्थ्य और आयु – मंगल से बल और शुक्र से सुख-सौंदर्य की प्राप्ति होती है।
6.कर्म संतुलन – शनि, राहु, केतु से जीवन के कठिन कर्म सहज होते हैं और आध्यात्मिक मार्ग खुलता है।
7.पूर्ण ब्रह्मांडीय सामंजस्य – इस चित्र के ध्यान से मनुष्य का जीवन ब्रह्मांड के नियम (ऋत) से जुड़क





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